📅 03-04 जून, 2026  |  📍 सीएसआईआर-IITR, लखनऊ

संस्थान का परिचय

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ विषविज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक प्रतिष्ठित वैश्विक केंद्र है, जिसका उद्देश्य सतत पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य में सुधार हेतु अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से कार्यान्वयन योग्य समाधान प्रदान करना है। यह संस्थान विषविज्ञान के क्षेत्र में भारत का अग्रणी तथा विश्व के गिने-चुने संस्थानों में से एक है, जो विगत लगभग छह दशकों से अपने आदर्श वाक्य “बेहतर स्वास्थ्य एवं सुरक्षित पर्यावरण के लिए” के साथ मानव स्वास्थ्य एवं प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत है। संस्थान वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवोन्मेषी तकनीकों के माध्यम से जनसामान्य के जीवन स्तर में सुधार कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है तथा देश की आवश्यकताओं के प्रति पूर्णतः समर्पित है। आज विषविज्ञान अनुसंधान पारंपरिक जंतु-आधारित अध्ययनों से आगे बढ़कर अत्याधुनिक जीवविज्ञान एवं रसायन विज्ञान के अंतर्विषयक क्षेत्रों, जैसे ओमिक्स एवं पोस्ट-ओमिक्स प्रौद्योगिकियों तक विकसित हो चुका है। संस्थान ने रसायनों के विषाक्त प्रभावों के पूर्वानुमान एवं मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे औद्योगिक श्रमिकों, खनिकों, किसानों तथा आम जनमानस को व्यापक लाभ प्राप्त हुआ है। बायोमार्कर विकास, जंतु-मॉडल के विकल्प, प्रीडिक्टिव विषविज्ञान, तथा विभिन्न पर्यावरणीय मैट्रिक्स में विषैले एवं अपमिश्रित रसायनों की पहचान एवं विश्लेषण हेतु उन्नत विधियों का विकास संस्थान की प्रमुख उपलब्धियाँ हैं, जो मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रही हैं। सीएसआईआर संस्थानों में इस संस्थान को विषाक्तता परीक्षण हेतु गुड लैबोरेटरी प्रैक्टिस (जीएलपी) मान्यता प्राप्त करने का विशिष्ट गौरव प्राप्त है। इस सुविधा के माध्यम से संस्थान छोटे एवं मध्यम उद्यमों द्वारा विकसित उत्पादों के सुरक्षा आकलन कर उन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रमाणित करने में सहयोग देता है, जिससे “मेक इन इंडिया” अभियान को भी बल मिलता है। साथ ही, नियामक विषविज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु संस्थान की प्रयोगशालाएँ राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसे भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफ़एसएसएआई) द्वारा ‘राष्ट्रीय संदर्भ प्रयोगशाला’ के रूप में मान्यता प्राप्त है तथा यह उन्नत तकनीकी प्लेटफार्मों के माध्यम से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कार्य कर रहा है। कुशल मानव संसाधन के विकास के लिए संस्थान शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी सक्रिय है। यह जीवन विज्ञान क्षेत्र कौशल विकास परिषद (एलएसएसएसडीसी) तथा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) से संबद्ध होकर जीवन विज्ञान एवं कृषि कौशल से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रहा है। संस्थान ने अपने अनुसंधान एवं गतिविधियों को भारत सरकार के विभिन्न मिशनों एवं सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप समन्वित किया है। यहाँ शोधार्थियों को प्रदान किया जाने वाला उच्च स्तरीय प्रशिक्षण न केवल कुशल मानव संसाधन विकसित करता है, बल्कि ऐसे युवा वैज्ञानिकों का निर्माण करता है जो देश-विदेश के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं, उद्योगों, औषधि कंपनियों तथा नियामक निकायों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। सीएसआईआर-आईआईटीआर उच्चकोटि के अनुसंधान, व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रमों तथा वायु, जल, खाद्य एवं मृदा की नियमित निगरानी के माध्यम से एक सुरक्षित एवं स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण हेतु सतत प्रतिबद्ध है।

संगोष्ठी का परिचय

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ द्वारा राष्ट्रीय वैज्ञानिक हिंदी संगोष्ठी “पर्यावरणीय संकट और जनस्वास्थ्य: वर्तमान चुनौतियाँ एवं वैज्ञानिक समाधान” का आयोजन दिनांक 03-04 जून, 2026 के दौरान किया जा रहा है। वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय परिवर्तन, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन तथा उभरते विषैले तत्व मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं। तीव्र औद्योगिकीकरण, शहरीकरण एवं तकनीकी विस्तार ने जहाँ मानव जीवन को सुविधाजनक बनाया है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणीय असंतुलन और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों में भी वृद्धि की है। आज का युग कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल नवाचारों का युग है, जो पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान हेतु नई संभावनाएँ प्रस्तुत कर रहा है। आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदूषण की निगरानी, जोखिम आकलन तथा स्वास्थ्य प्रबंधन को अधिक प्रभावी एवं सटीक बनाया जा सकता है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, जैसे कि अत्यधिक तापमान, जल संकट, जैव विविधता में कमी तथा नई बीमारियों का प्रसार, मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। इसके साथ ही माइक्रोप्लास्टिक, नैनोकण तथा ई-वेस्ट जैसे उभरते प्रदूषक पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए दीर्घकालिक जोखिम उत्पन्न कर रहे हैं। इन चुनौतियों के समाधान हेतु प्रकृति आधारित समाधान, सतत विकास लक्ष्य, तथा “वन हेल्थ” दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हो रहे हैं। यह दृष्टिकोण मानव, पशु और पर्यावरण के बीच समन्वित संबंध स्थापित करते हुए समग्र स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है। साथ ही, जनजागरूकता, व्यवहार परिवर्तन और सामाजिक सहभागिता भी पर्यावरण संरक्षण एवं स्वास्थ्य सुधार के लिए आवश्यक घटक हैं। वैज्ञानिक ज्ञान को सरल हिंदी भाषा में प्रसारित कर समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचाना इस संगोष्ठी का एक प्रमुख उद्देश्य है। यह संगोष्ठी वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करेगी, जहाँ वे स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से संबंधित समकालीन चुनौतियों पर विचार-विमर्श करते हुए नवाचार आधारित समाधान प्रस्तुत कर सकेंगे। इस संगोष्ठी के माध्यम से “स्वस्थ भारत” एवं “स्वच्छ भारत” के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में सार्थक योगदान देने का प्रयास किया जाएगा। विगत वर्षों में सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ ने जन-सामान्य से जुड़े विषयों पर हिंदी में पाँच राष्ट्रीय तथा तीन अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठियों का सफल आयोजन किया है। संस्थान ने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों तथा उद्योगों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर कर सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा दिया है। संस्थान स्थानीय भाषा में ज्ञान के प्रसार एवं राजभाषा हिंदी के संवर्धन हेतु विशेष रूप से प्रतिबद्ध है। हाल ही में गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित दिनांक 20 फरवरी 2026 को अगरतला में संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन में राजभाषा कार्यान्वयन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार मुख्य अतिथि श्री अमित शाह, माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री के कर-कमलों से डॉ. माणिक साहा, माननीय मुख्यमंत्री, त्रिपुरा एवं श्री बंडी संजय कुमार, माननीय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में संस्थान को प्रदान किया गया। संस्थान को पूर्व में भारत सरकार के प्रतिष्ठित ‘राजभाषा कीर्ति पुरस्कार’ के अंतर्गत हिंदी पत्रिका “विषविज्ञान संदेश” के लिए द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। संस्थान का वार्षिक प्रतिवेदन विगत कई वर्षों से द्विभाषी (हिंदी एवं अंग्रेजी) रूप में नियमित रूप से प्रकाशित किया जा रहा है तथा समय-समय पर वैज्ञानिक विषयों पर हिंदी में आमंत्रित व्याख्यान भी आयोजित किए जाते हैं। देश की आवश्यकताओं एवं राष्ट्रीय मिशन कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए संस्थान की टीम ‘स्वस्थ भारत’ एवं ‘स्वच्छ भारत’ अभियानों के अंतर्गत समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही है। इसी क्रम में, जन-सामान्य से जुड़े समकालीन विषयों को समाहित करते हुए संस्थान द्वारा इस राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जो वैज्ञानिक संवाद, नवाचार और जन-जागरूकता को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी।

हमारे बारे में

संगोष्ठी का उद्देश्य

यह संगोष्ठी विज्ञान, पर्यावरण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हिंदी भाषा के माध्यम से ज्ञान साझा करने का एक अनूठा अवसर है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों पर विचार-विमर्श

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल तकनीकों की भूमिका को समझना

सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए नवीन समाधान प्रस्तुत करना

वैज्ञानिक शोध को हिंदी भाषा में बढ़ावा देना

समाज, नीति एवं जनजागरूकता के बीच समन्वय स्थापित करना

कार्यक्रम

संगोष्ठी के सत्र

चार विशेष सत्रों में पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा

सत्र 1

पर्यावरणीय जोखिम एवं स्वास्थ्य निगरानी: उभरती प्रौद्योगिकियाँ और नवाचार

सत्र 2

उभरते प्रदूषक एवं उनका मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव

सत्र 3

प्रकृति आधारित समाधान द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं स्वास्थ्य सुधार

सत्र 4

शोध संस्थानों में प्रशासनिक प्रबंधन

विषय-सूची

संगोष्ठी के विषय

निम्नलिखित 11 विषयों पर शोधपत्र एवं प्रस्तुतियाँ आमंत्रित हैं

जलवायु परिवर्तन और उभरते स्वास्थ्य संकट

वन हेल्थ व जैव प्रौद्योगिकी आधारित समाधान

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जैव प्रौद्योगिकी का संयोजन

ई-वेस्ट (E-waste) से उत्पन्न विषाक्तता और पर्यावरणीय जोखिम

सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में पर्यावरण और स्वास्थ्य का संबंध

स्मार्ट सिटी और पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रबंधन

डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी और प्रदूषण से बचाव

जनजागरूकता और व्यवहार परिवर्तन की भूमिका

पर्यावरण और मानसिक स्वास्थ्य का संबंध

पर्यावरणीय चुनौतियाँ और स्वास्थ्य प्रभाव: समाधान और सतत विकास

योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा स्वास्थ्य संवर्धन

दिशा-निर्देश

प्रतिभागिता विवरण

सारांश प्रारूप

  • सारांश A-4 आकार के कागज में चारों ओर एक इंच मार्जिन देकर कंप्यूटर से टंकित होना चाहिए।
  • प्रत्येक पैराग्राफ के बाद समुचित जगह छोड़ें। दो पंक्तियों के मध्य 1.5 स्पेसिंग रखें।
  • सभी सारांश देवनागरी लिपि में यूनिकोड फॉण्ट में टंकित हों। लेख MS Word में हो।
  • लेख की शब्द सीमा 300–500 शब्द होनी चाहिए।
  • प्रस्तुति हेतु Microsoft PowerPoint का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • पोस्टर प्रस्तुति हेतु आकार 3×4 फुट होना चाहिए।

सारांश जमा करने की प्रक्रिया

  • सारांश की भाषा सरल हिंदी में हो — रोचक, बोधगम्य और जनसाधारण के लिए उपयोगी।
  • ऐसे वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दों का प्रयोग करें जो प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाएँ।
  • टंकित सारांश की सॉफ्ट प्रति MS Word फॉर्मेट में ईमेल करें:

  • चुने गए सारांश से पूर्ण लेख पत्रिका "विषविज्ञान संदेश" में प्रकाशित होगा।
पंजीकरण

पंजीकरण शुल्क

पंजीकरण केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किया जाएगा

शोध छात्र

₹1,500

Research Scholars / Ph.D. Students

📋 सारांश:18 मई, 2026 तक
📅 पंजीकरण:20 मई, 2026 तक
पंजीकरण करें

विज्ञापन देने वाले संस्थानों के 2 नामित प्रतिभागियों हेतु कोई पंजीकरण शुल्क देय नहीं है।

संपर्क

संपर्क जानकारी

अध्यक्ष / Chairperson

डॉ. आलोक कुमार पाण्डेय

CSIR-IITR, लखनऊ
संयोजक / Convener

डॉ. कौसर महमूद अंसारी

CSIR-IITR, लखनऊ
सह संयोजक / Co-Convener

श्री शुभांग मिश्रा

CSIR-IITR, लखनऊ

संपर्क विवरण

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान,
31, महात्मा गांधी मार्ग, लखनऊ – 226 001

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